मुख्य सामग्री पर जाएं
eco ग्रीन मॉर्निंग!
२ / १४
|
प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
२ / १४
chevron_left
chevron_right
प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय २ / १४
menu_book अध्याय २
अवधी गद्य

अवधी किहानी, सुघरी -2

अवधी किहानी - सुघरी 2

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 20 Oct 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
spa
अवधी किहानी, सुघरी -2
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

अवधी कहानी

====सुघरी====

लेखक:- प्रदीप सारंग



       सुघरी जब से शहर के स्कूल मा पढ़ै का जाय लागि है वहि के तेवर मा अउर ज्यादा धार आई है। वहि के जवाब या तौ सवाल की तरह हुवत हैं या फिर अतने नुकील और चुटील कि सुनय वाले के आँखिन के समने अँधेरु छाय जात हवै। यानी जवाब सुनि कै लोग आगे केर सवालै भूलि जात हैं। अब तौ गाँव केर लोग सुघरी से बेमतलब वाले हालौ चाल पूछै मा अचकचाय लागि हैं।

      आजु सुघरी केर मन सबेरेन से कुछ खराब है। कारन है कि लोग अपने अकेलि उन्नति व स्वारथ के आगे, गाँव कै उन्नति व सफाई का वजन नाही दै रहे हैं। 

     आजुइ सबेरे कै बात आही स्कूल जात समय समने से गन्ना लदी ट्राली आवत देखि सुघरी सायकिल से उतरि कै किनारे दत्ताइन आजी के दुआरे खड़ी होइगै। काहेकि एक तौ रास्ता साँकरि दूसरे तीन गुना गन्ना लादे, सबधर रस्ता घेरि कै चलत हैं ट्रैक्टर ट्राली। किनारे नरदहा केर पानी भरा है उ अलग। सुघरी का खड़ी देखि आजी बोल्कारै बरे पूछिन- बिटिया! पढ़ै जाय रही हौ ? सुघरी बोली- नाहीं दादी... खरीदी करै जाइत है। हमरे स्कूल मा पढ़ाई फ्री नाहीं मिलत हवै। पता नहीं आजी कुछ समझिन कि नाहीं मुल आगे अउर कुछ पूछिन नाहीं।

     ओवरलोडिंग के गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्रॉली धीरे चलतै हैं। खड़े खड़े 5 मिनट बीति गे हैं। जेहिसे स्कूल का देर हुवय लागि है। मुल आगे रस्ता साँकरि हुवय के कारन सब लड़िका लड़की आय कै दत्ताइन आजी के द्वारेन रुके हैं।

       सबका देर हुवय केर चिन्ता होय रही है। स्कूलन के बीच आपस मा खेलकूद हुवय का हैं जोरन कै तैयारी चलि रही है। सुबह के समय अउर इंटरवल मा सबै अपने खेल कै अभ्यास करत हैं। बैडमिंटन औरु कबड्डी सुघरी केर प्रिय खेल आहैं। यहि से बैग के साथ बैडमिंटन-किट भी पीठ पर टाँगि कै आवय जाय का परत है। बैडमिन्टन किट कन्धे पर टाँगे के बादि सुघरी के मन मा कुछ स्पेशल एनर्जेटिक फील आय जात है। चेहरे पर मौजूद चमक अपने आपै बढ़ि जात है।

      पिछली बार हाईस्कूल बोर्ड हुवय से सुघरी खेल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिहिस रहै जेहिसे स्कूल टीम मा शामिल नहीं भै रहै, मुल अबकी ख्यालै का मनु बनाय कै हररोज इंटरवल मा तैयारी चलि रही है। 15 दिन बचे हैं यहि बरे स्कूल टाइम के बाद शाम का एक घण्टा खेल अभ्यास करावै का निर्णय प्रिंसिपल सर लिहिन हैं। आजु जब क्लास हाजिरी के बादि टीचर जी सबसे पूछिन कि खेल अभ्यास करै बरे स्कूल समय के बादि एक घण्टा जो-जो रुकि सकैं वहि आपन नाम लिखाय दियैं। कोई का जवाब नहीं मिला। क्लास टीचर दुबारा पूछिन तबौ कोउ जवाब न दिहिस। अबकी सुघरी का नाम लइकै पूछिन तौ सुघरी बोली कि अपने अहं मा डूबा उतरान पुरुष समाज लड़कियन का कौनव निर्णय लियै बरे छुट्टा नहीं छोड़े है। तौ बिना घर की इजाजत कोउ हामी कइसे भरि लियै। आजु आप पूछे हौ घरन मा पूछि कै काल्हि जवाब आई। रही हमार बात तौ अगर हमरे गाँव से और लड़कियन का घरन से इजाजत मिलि जाई तौ हमहूँ का मिलि जाई, अकेले हमहूँ का नाहिंन जाना जाय। क्लास टीचर हुँकारी भरिन औ खोपड़ी हिलाय कै चले गये।

      रोजुइ की तरह शाम का दुआरे लागै वाले जमघट मा जब मुनिया, चंदा, औरु निकुही के बाप आय गे तब जाय के सुघरी स्कूलै केर सालाना खेल मा शामिल हुवय वाली आपनि बात सबके समने कहिस।

      निकुही के बाबा बोले कि स्कूल पढ़ाई केर घर आँय कि खेल के। बिना कुछ सोचे समझे सुघरी तुरतै जवाब दिहिस कि पढ़ाई तौ घरै मा पढ़े का हुवत है, स्कूल मा सिर्फ कइसन पढ़ा जाय यहु सिखै जावा जात है। स्कूलन मा कतनी पढ़ाई हुवत है सबै तौ जानत हैं। साँचु यहु आय कि स्कूल जाइत है कढ़ै, पढ़ाई तौ हमका घरहिम करै का हुवत  है। खेल से तन मन फुर्तीला बना रहत है। जिनका कुल खेलहिन का है उनकै बातै अलग।

      सब के सब चुप। बप्पा बोले तुम जनतै होइहौ कि अकेले नहीं जाय का है, दुइ तीन का तैयार करौ और जाव। हमारि कौनिव रोक नाही है। हमका अपनी बिटिया पै पूरा भरोसा है। यहि पर सबै बोलि परे कि भरोसे मा कौनियू कमी नाही है मुल.... बीचै मा बात काटि कै सुघरी बोलि परी की जतने मुल हैं सबका जवाब है कि भरोसा कमजोर ना करौ, हम बिटिया लोग सिर झुकै ना दियबै। चिन्ता बेटवन की तरफ कुछ ज्यादा करत जाव। पूरे देश प्रदेश मा बिटियन से ज्यादा नम्बर बेटवा लाय नहीं पाय रहे हैं। तबौ सारे सवाल हमहिन सबसे..?? यहि तरके चिंता बेटवन कै करै का चाही।

       एकु बाबा कहिन- बिटिया कुछ ज्यादा बोलि गयेव। सुघरी का यहु जवाब उनहूँ केर बुद्धि शून्य करि दिहिस- बाहर आवै जाय के मसला पर हम बिटियन केर जौन ज्यादा चिन्ता करै का परत है वहिके असली कारण बेटवै हैं, जिन केर बत्तमीजी से हर माय बाप के मन मा डर बइठ है।

       सुघरी बताइस कि गाँव की चारि लोग रहबै मुल किरन दुखी है, अफसोस हमहू का है कि खेल मा किरन हमरे साथ ना रहि पाई। रामू काका कहत रहे कि इधर हमरे पास खेल कै फीश बरे पैसा नहीं है। काहेकि ज्यादा बरसात से अउर पानी निकरै का रास्ता न हुवय से हमारि चारिउ खेतन केर फसल जलभराव से खराब होइगै रहै। यहि बात पर सुघरी के बाबा बोल पड़े कि अगर तुम चहत हौ कि किरन के साथ रहे से अच्छा खेलिहौ तौ वहिकी फीश तोर बाप जमा करि देई, रमुआ के पास जब होइहैं तब वापिस करी। ना भी करि पाई तौ हम मानि लियब कि हम अपनी पोती के लिए एक सहयोगी बरे फीश जमा किया है।

       अतना सुनतै सुघरी कै आँखी डबडबाय आईं.... औ दौरि कै बाबा के गले लागि गै, सुघरी कै खुशी देखि के बाबौ की आँखिन से खुशी छलकि आई। सब जन हर्षाय गए, औरु मनै मन अतना उल्लास भवा मनौ आजै सुघरी जीति आई है।

       सुघरी अपने ज्ञान आचरण औ समझदारी से पास-पडोस के गाँवन की बिटेवन के बीच आईकॉन जइस बनिगै है। सबै के माय बाप  सुघरी केर उदहारन दियत रहत हैं, अउर बिटेवै खुदै सुघरी जइस बन जावा चहत हैं।  सबकी नजरै अगले हफ्ता हुवय वाले खेल तरफ लागी हैं। खेल प्रतियोगिता तौ दुइन स्कूलन के बीच है मुल सुघरी के कारन स्कूल मा पहिलीबार बिटेवन केर खेल टीम बनि पाई है। यहि बरे प्रतियोगिता केर बहुतै परचार है। कइयु साल बादि अबकी जौन उत्साह देखाय परि रहा है यहिसे स्कूलौ का लागै लाग है कि टीम जीति कै जरूर आई।

       खेल वाले दिन, बिटेवन केर कबड्डी खेल देखै बरे, आस-पास के गाँवन से जन सैलाब उमड़ि आवा। अपने घर परिवार, पड़ोस के लोगन का देखि कै कप्तान सुघरी सहित खिलाड़ी बिटेवन केर हौसला बदरे तलक बुलन्द होइगे। सुघरी केर टीम अइस खेलिस कि विरोधी टीम पाँचै मिनट मा ढेर होइगै। दूसरि पारी भी अइसै  रही।  सुघरी बहुत आसानी से कबड्डी जीति कै स्कूल का जलवा बुलन्द करि दिहिस। पढ़ाई मा जिला टॉप करै वाली सुघरी, खेलौ मा हीरोइन बनिगै। सबै सुघरी का काँधे पर उठाये अइसन मैदान भर मा घुमाइन जइसै जगु जीति लिहिस हुवय।

       

auto_stories

— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
२ / १४
auto_stories

ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल १४ आलेख व अध्याय
१
आलेख

कुछ अच्छे लोग

10 min read
chevron_right
२
अवधी गद्य

अवधी किहानी, सुघरी -2

10 min read
chevron_right
३
अवधी गद्य

झरिहख

10 min read
chevron_right
४
हिंदी पद्य

दोहे- "नारी"

10 min read
chevron_right
५
आलेख

नेग की जबरन वसूली नहीं कर सकेंगे किन्नर-हाईकोर्ट

10 min read
chevron_right
६
आलेख

मैं फेल हुआ या पास....?

10 min read
chevron_right
७
आलेख

विचलन बनाम छतिपूर्ति

10 min read
chevron_right
८
आलेख

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास

10 min read
chevron_right
९
आलेख

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता

10 min read
chevron_right
१०
आलेख

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

10 min read
chevron_right
११
आलेख

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

10 min read
chevron_right
१२
आलेख

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार

10 min read
chevron_right
१३
आलेख

स्त्री बनाम पुरूष

10 min read
chevron_right
१४
अवधी गद्य

सुघरी

10 min read
chevron_right
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

share

इस संस्मरण को साझा करें

अवधी भाषा और ग्रामीण जीवन के यथार्थ को जन-जन तक पहुँचाएँ

WhatsApp Facebook Twitter/X LinkedIn

श्री प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— श्री प्रदीप सारंग
gavel

लेखक विचार अस्वीकरण (Editorial & Author Disclaimer)

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

सभी स्वीकृत आलेख देखें arrow_forward
कुछ अच्छे लोग आलेख
20 Oct 2026 • 8 min read

कुछ अच्छे लोग

संस्मरण मेरठ यात्रा

झरिहख अवधी गद्य
18 Oct 2026 • 8 min read

झरिहख

आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।

दोहे- "नारी" हिंदी पद्य
16 Oct 2026 • 8 min read

दोहे- "नारी"

नारी बनाम पुरुष

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

अवधी किहानी, सुघरी -2 एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
verified

"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

eco आँखें फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित तथा प्रदीप सारंग द्वारा संस्थापित "ग्रीन गैंग"

स्वयंसेवक / सदस्यता सहभागिता प्रपत्र

कृपया अपनी सही जानकारी भरें ताकि आपके निकटतम क्षेत्र के ग्रीन गैंग समन्वयक आपसे संपर्क कर सकें।

eco

सदस्यता दो प्रकार की है-

1 ग्रीन स्वयंसेवक ₹500 • एक बार

एक बार 500 रुपये जमा करने वाले व्यक्ति को ग्रीन स्वयं सेवक "ग्रीन वॉलंटियर" तथा "हरित स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

2 स्वयंसेवक ₹50 • १ वर्ष

50 रुपये जमा करके कोई व्यक्ति एक वर्ष के लिए "वालंटियर" तथा "स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

payments

ग्रीन स्वयंसेवक शुल्क भुगतान — ₹500

ग्रीन स्वयंसेवक ("ग्रीन वॉलंटियर" / "हरित स्वयंसेवक") हेतु ₹500/- का भुगतान कर स्क्रीनशॉट अपलोड करें।

₹500 • एक बार / स्थायी
UPI QR Code
BHIM UPI • GPay • PhonePe • Paytm

ग्रीन स्वयंसेवक ₹500 QR कोड

Aankhe Foundation

alternate_email pradeep@upi
खाता धारक: Aankhe Foundation
बैंक व खाता संख्या: Canara Bank (3110201013680)
IFSC कोड: CARB0018631
eco एक बार 500 रुपये जमा करने वाले व्यक्ति को ग्रीन स्वयं सेवक "ग्रीन वॉलंटियर" तथा "हरित स्वयंसेवक" कहा जायेगा।
UPI / बैंक भुगतान की रसीद या स्क्रीनशॉट (JPG, PNG, PDF)
12 अंकों का UPI UTR नंबर या बैंक रेफरेंस नंबर दर्ज करें
volunteer_activism माटी और मनुष्यता का ऋण • 100% पारदर्शी एवं जन-समर्पित सहयोग

लोक-सहयोग एवं दान संकल्प (Donate Now)

प्रदीप सारंग जनसेवा एवं पर्यावरण न्यास — आपका प्रत्येक अंशदान सीधे ज़मीनी बदलाव लाता है।

UPI QR Code
BHIM UPI • GPay • PhonePe • Paytm

आधिकारिक UPI QR कोड

Aankhe Foundation

alternate_email pradeep@upi
खाता धारक: Aankhe Foundation
बैंक व खाता संख्या: Canara Bank (3110201013680)
IFSC कोड: CARB0018631
verified भुगतान के उपरांत नीचे दिए गए प्रपत्र में UTR दर्ज करें। डिजिटल पावती तुरंत जारी की जाएगी।
₹
12 अंकों का UPI UTR नंबर अथवा बैंक संदर्भ संख्या
JPG, PNG अथवा PDF रसीद अपलोड करें