ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'
पर्यावरण संरक्षण जब तक केवल सम्मेलनों और भाषणों तक सीमित रहेगा, तब तक धरती हरी-भरी नहीं हो सकती। 2019 में बाराबंकी के सतरिख और कमरावां अंचल में जब युवाओं की टोली 'ग्रीन गैंग' के रूप में संगठित हुई, तो संकल्प लिया गया कि प्रकृति की रक्षा हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनेगी। हमने कहा कि सुबह उठकर केवल गुड मॉर्निंग कहने से दिन अच्छा नहीं होगा, जब तक हाथ में एक पौधा लेकर 'ग्रीन मॉर्निंग' न कहें!
ग्रीन गैंग के सदस्यों ने न केवल पौधरोपण किया, बल्कि प्रत्येक पौधे को वृक्ष बनने तक गोद लिया। गाँव की बंजर जमीनों, पगडंडियों और स्कूलों में नीम, पीपल, बरगद, जामुन और महुआ जैसे पारंपरिक छायादार व फलदार पेड़ लगाए गए। आज बाराबंकी की सड़कों के किनारे लहलहाती अमराई इस जन-आंदोलन की साक्षी है। धरती को हरा-भरा रखना किसी सरकार का नहीं, हर उस मनुष्य का प्राथमिक धर्म है जो इस मिट्टी का अन्न खाता है और इस हवा में साँस लेता है।