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साहित्य व विचार (Literature & Thoughts)

अवधी रचनाएं, पर्यावरण विचार एवं सामाजिक दृष्टिकोण

प्रदीप सारंग एवं अन्य प्रबुद्ध विचारकों द्वारा लिखित उत्कृष्ट आलेख, संस्मरण और विचार:

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

लेखक: प्रदीप सारंग • 20 May 2026

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है...

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झरिहख

लेखक: प्रदीप सारंग • 19 May 2026

वर्षा, बचपन और गाँव की चौपाल के सजीव संस्मरण — जब छत पर टपकती बूँदें और टीनसेट पर झमझम आवाज नींद उड़ा देती थी।

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सुघरी

लेखक: प्रदीप सारंग • 14 May 2026

मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।

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सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

लेखक: प्रदीप सारंग • 02 May 2026

"पेड़, पखेरू, नदियाँ और मनुष्य की अस्मिता" — अवधी के प्राण-छंद कुण्डलियाँ में रचित लोक-चेतना और पर्यावरण के अमर स्वर।

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ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'

लेखक: प्रदीप सारंग • 22 Apr 2026

बाराबंकी के गाँवों से उठी वह हरित क्रांति, जिसने युवाओं को पेड़ लगाने और अभिवादन में 'ग्रीन मॉर्निंग' बोलने का नया संस्कार सिखाया।

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परिंदा-संरक्षण: मिट्टी के सकोरे और बेजुबान पक्षियों की प्यास

लेखक: प्रदीप सारंग • 10 Apr 2026

भीषण ग्रीष्मकाल में जब नदियाँ और तालाब सूख जाते हैं, तब छतों और पेड़ों पर रखे 10,000+ मिट्टी के सकोरे हज़ारों परिंदों के लिए जीवनदायिनी संजीवनी बनते हैं।

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अवधी साहित्य और ग्रामीण पत्रकारिता के चार दशक: एक सिंहावलोकन

लेखक: प्रदीप सारंग • 28 Mar 2026

1986 से 2026 तक: गाँव की चौपालों से लेकर दैनिक समाचार पत्र 'सन्दौली टाइम्स' के संपादन तक, अवधी लोक-भाषा और जमीनी पत्रकारिता का 40 वर्षों का अविस्मरणीय सफर।

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